करवाचौथ पूजा शुभ महुर्त में

करवाचौथ पूजा शुभ महुर्त में – karvachouth puja shubh mahurat me

करवाचौथ पूजा शुभ महुर्त में
जय श्री करावा माता

करवा चौथ

करवाचौथ का व्रत सुबह सूर्योदय से पहले 4 बजे के बाद शुरु हो जाता है और रात को चाँद को देखेने के बाद ही व्रत को खोला जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाती है औ करवाचौथ व्रत की कथा सुनी जाती है।इस दिन बहुत से स्वादिस्ट पकवान बनाये जाते है | कुछ पकवान आप हमारे करवा चौथ स्पेशल मे भी देख सकते है (यदि आप करवाचौथ स्पेशल देखना चाहते है तो आप करवाचौथ स्पेशल पर क्लिक करे ) | सामान्यत: विवाहो के बाद 12 या 16 साल तक लगातार इस उपवास को करना जरुरी है यदि आप चाहे तो जीवन भर भी आप इस व्रत को  अपने पति की लंबी उम्र के लिये रख सकती है |हमारा मानना है की अपने पति की लम्बी आयु के लिए इससे श्रेष्ठ कोई उपवासया व्रत नहीं है।

दोस्तों आप करवा चौथ के महत्त्व और विशेषताओ के बारे में पड़ना चाहते है तो तो यहाँ क्लिक करे – करवा चौथ के महत्त्व

करवा चौथ 2018 का शुभ महूरत एवं विधि

27अक्तूबर

करवा चौथ पूजा मुहूर्त-  सायं 5:55 से 7:09 तक

चंद्रोदय- रात्रि 8:14

चतुर्थी तिथि आरंभ- प्रातः4:58 8 अक्तूबर

चतुर्थी तिथि समाप्त- दोपहर 2:16 9 अक्तूबर

करवा चौथ पर्व की पूजन सामग्री

सिंदूर , शहद, अगरबत्ती, फूल,फल ,कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, कुमकुम ,महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीवाला करवा ढक्कन सहित , दीया, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ-सात पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे।

करवा चौथ पूजन विधि

  • सुबह को सभी रोज की दिनचर्या से निपट कर नहा धोकर व्रत का संकल्प ले |
  • व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें यदि निर्जल न रह पाए तो दोपहर १२ बजे से पहले चाय ,जूस या पानी पि सकते है ।
  • व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें-
  • प्रातः पूजा के समय इस मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ किया जाता है-‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’
  • घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर चावलों को पीसे।फिर इस घोल से करवा चित्रित करें या बाजार से चित्र लाकर लगा दे । इस रीती को करवा रखना कहते है |
  • शाम के समय, माँ पार्वती की फोटो या प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें लकड़ी के आसार पर बिठाए।
  • माँ पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें।
  • भगवान शिव और माँ पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे , पीतलया ताम्बे के करवे, में पानी भरकर पूजा करें।
  • सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत करके करवचौथ व्रत की कथा सुने।
  • सायं काल में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें जल चड़ने के बाद पतिके हाथ से अन्न एवं जल ग्रहण करें।
  • पति सास –ससुर ,जेठ – जेठानी आदि सभी बड़ो का पैर छूकर आशीर्वाद ले और अपना व्रत पूरा करे |

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Post Author: Seema Gupta