Hanuman Jaynti Vrat katha

Hanuman Jaynti Vrat katha-हनुमान जयंती व्रत कथा 

Hanuman Jaynti Vrat katha

दुनिया चले न श्रीराम के बिना।
रामजी चलें न हनुमान के बिना।
पार न लगोगे श्रीराम के बिना।
राम न मिलेंगे हनुमान के बिना।।

 

हनुमान जयंती भारत में लोगों के द्वारा हर साल, हिन्दू देवता हनुमान जी के जन्म दिवस को मनाने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। भारतीय हिन्दी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर साल चैत्र (चैत्र पूर्णिमा) माह के शुक्ल पक्ष में 15वें दिन मनाया जाता है।

इस प्रकार की और कथा पड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे 

हनुमान जन्म कथा

राम भक्त हनुमान जी भगवान हनुमान माता अंजनी और वानर राज केसरी के पुत्र हैं। एक बार जब हनुमान जी को बड़ी तीव्र वेग से भूख लगी तब हनुमान जी लाल सूर्य को फल समझ कर उनके पास जा पहुंचे। जैसे ही हनुमान जी ने भगवान सूर्य को निगलना चाहा तभी स्वर्ग के स्वामी ने अपने वज्र से उनके मुख पर प्रहार कर दिया। इस प्रहार के कारण हनुमान जी टोडी टेढ़ी हो गई । इसीलिए माता अंजनी के पुत्र का नाम हनुमान पड़ा।

चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान श्री हनुमान जी का जन्म दिवस होने के विषय में एक कथा प्रसिद्ध है. कहते है, कि जब अग्नि देव से मिली खीर, राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को बांट दी, तो कैकेयी के हाथ में से एक चील ने झपट्टा मारकर कुछ खीर मुंह में ले ली, और वापस उड गई. चील जब उडती-उडती देवी अंजना के आश्रम के ऊपर से उड रही तो, अंजना ऊपर देख रही थी.

अंजना का मुंह खुला होने के कारण खीर का थोडा भाग उसके मुंह में आकर गिर गया और अनायास ही वह उस खीर को खा गई. जिससे उनके गर्भ से शिवजी के अवतार हनुमान जी ने जन्म लिया. चैत्र मास की पुन्य तिथि पूर्णिमा के मंगलवार के दिन, जनेऊ धारण किये हुए हनुमान जी का जन्म हुआ था.

हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान जयंती के दिन व्रती हनुमान जी की विशेष पूजा-आराधना करते है। हनुमान मंदिरो में रामभक्तो द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ तथा विशेष आरती का आयोजन किए जाते है। हनुमान जी को गुरु माना गया है। जोकि भगवान शिव जी के 11 वॉ रूप है।

 एकादशी की कथा एवम इतिहास

विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करने से राम भक्त हनुमान जी प्रसन्न होते है और व्रती को मनोवांछित फल देते है। इस तरह हनुमान जयंती की कथा सम्पन्न हुई। प्रेम से बोलिए राम भक्त हनुमान जी की जय।

हनुमान जयंती का समारोह प्रकृति के अद्भुत प्राणी के साथ पूरी हनुमान प्रजाति के सह-अस्तित्व में संतुलन की ओर संकेत करता है। प्रभु हनुमान वानर समुदाय से थे, और हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी को एक दैवीय जीव के रुप में पूजते हैं। यह त्योहार सभी के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है, हालांकि ब्रह्मचारी, पहलवान और बलवान इस समारोह की ओर से विशेष रुप से प्रेरित होते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों के बीच में बहुत से नामोंसे जाने जाते हैं; जैसे- बजरंगवली, पवनसुत, पवन कुमार, महावीर, बालीबिमा, मारुतसुत, संकट मोचन, अंजनिसुत, मारुति, आदि।

हनुमान जी की आरती –

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अनजानी पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।

पैठी पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।

बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।

जो हनुमान जी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

Post Author: Seema Gupta