Doosare din devi Brahmachaarinee kee pooja ka mahatv

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एक समय की बात है बृहस्पति जीने ब्रह्मा जी से कहा कि हे ब्रह्मन ! आप अत्यंत बुद्धिमान, सर्वशास्त्र ज्ञानी और चारों वेदों को जानने वाले हैं| हे प्रभु कृपया कर मुझे बताये की चैत्र व आश्विन माह के शुक्ल पक्ष में नवरात्र का व्रत क्यूँ किया जाता है? इस व्रत को करने से क्या फल मिलता है? पहले इस व्रत को किसने किया ? बृहस्पति जी के वचन सुनकर ब्रह्माजी बोले – हे बृहस्पते! तुमनेजग के कल्याण हेतु बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है| जो मनुष्य मनोरथ पूर्ण करने वाली दुर्गा, महादेवी, सूर्य और नारायण का ध्यान करते हैं वे मनुष्यसभी सुखो को भोगते हुए वकुंथ धाम को जाते है |

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नवरात्रि के नौ दिनों में से हर दिन का अलग महत्‍व होता है। हर दिन देवी मां के अलग स्‍वरूप की पूजा होती है और सभी की आराधना एक भिन्‍न भाव से की जाती है। माता को समर्पित सभी नौ दिन, मानवता के लिए होते हैं लेकिन विशेषताएं अलग होती हैं।

नवरात्रि वर्ष में चार बार पड़ती है- माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन. नवरात्रि से वातावरण में तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है. मन में उल्लास, उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है.

दुनिया में सारी शक्ति, नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही है, इसलिए इसमें देवी की उपासना ही की जाती है.

नवरात्रि स्पेशल: पहले दिन देवी के शैलपुत्री स्वरुप की पूजा का महत्व

नवरात्रि स्पेशल: दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी स्वरुप की पूजा का महत्व

नवरात्रि के दूसरे देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी तप, वैराग्य और सदाचार का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से साधक को सफलता, ज्ञान और मन की शांति प्राप्त होती है।नवरात्रि के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा की जाती है। देवी के इस स्‍वरूप का आविर्भाव, ब्रह्मा से हुआ है, जिनका नाम, तप का प्रतीक है। देवी ब्रह्मचारिणी भी माता पार्वती का ही स्‍वरूप हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के 9 रूपों की पूजा की जाती है. नवदुर्गा हिंदु धर्म में माता दुर्गा या पार्वती के 9 रूपों को एक साथ कहा जाता है. इन्हें पापों की विनाशिनी कहा जाता है. हर देवी के अलग-अलग वाहन हैं, अस्त्र-शस्त्र हैं.

आज नवरात्रि का दूसरा दिन है| आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है|

नवरात्रि के पावन दिनों के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे रुप देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी को सभी विधाताओं और ग्रंथों का ज्ञाता माना जाता है। तप, वैराग्य, सदाचार और संयम जैसे गुणों की प्राप्ति के लिए इनकी आराधना की जाती है।

इनकी पूजा क्यों की जाती है: देवी ब्रह्मचारिणी को तप, वैराग्य और सदाचार का स्वरुप माना जाता है। दूसरे दिन इनकी पूजा करने से साधक अपने मन को स्वाधिष्ठान चक्र स्थित करता है। स्वाधिष्ठान चक्र हमारे शरीर में मौजूद 7 चक्रों में से एक है। यह चक्र हमारी कमर से नीचे के हिस्से के स्वास्थ्य के लिए जरुरी होता है। देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना से आपको बुद्धि, विवेक और धैर्य की प्राप्ति होती है।

पूजा का मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां ब्रह्मचारिणी का पसंदीदा भोजन

मां ब्रह्मचारिणी– मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भेग लगाया जाता है. इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य भी पाया जा सकता है|

  1. नवरात्र के दिनों में नव कन्याओं को अन्तिम नवरात्र को घर बुलाकर भोजन अवश्य कराए।
  2. नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। देवी चंद्रघंटा, बहादुरी और सौंदर्य का प्रतीक मानी जाती हैं।

Post Author: Seema Gupta