अहोई माता व्रत विधि

Ahoi Mata Vrat Vidhi -Shubh mahorat sahit -अहोई माता व्रत विधि -शुभ महोरत सहित

अहोई माता की व्रत कथा

नमस्कार दोस्तों करवा चौथ बीत गई है और करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अष्टमी तिथि को देवी अहोई माता की पूजा एवं व्रत किया जाता है। यह व्रत पुत्र की लम्बी आयु और सुखमय जीवन की कामना  से किया जाता है |यह व्रत केवाल पुत्रवती महिलाएं करती हैं| कृर्तिक मास की चौथ को करवा चौथ एवं अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है| जिस प्रकार नवरात्र व्रत कथा ,करवाचौथ व्रत कथा ,वट सावित्री व्रत कथा ,एकादशी व्रत कथा आदि की कथा और व्रत का क्या विधान हमने अपने पेज bookbaak.com पर लिखा है |इसी प्रकार हम अहोई की कथा और विधि पर हम आगे बात करते है तो दोस्तों अब हम पहले अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनते हैं|

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अहोई माता व्रत विधि (Ahoi Mata Vrat Vidhi):

व्रत के दिन प्रात: उठकर  सभी कामो से निपट कर स्नान करें और पूजा पाठ करके संकल्प करें कि पुत्र की लम्बी आयु एवं सुखमय जीवन हेतु मैं अहोई माता का व्रत कर रही हूं.| अहोई माता मेरे पुत्रों को दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी रखना और अनहोनी को होनी बनाने वाली माता देवी पार्वती हैं इसलिए माता पर्वती की भी पूजा करें. अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवाल पर अहोई माता का चित्र बनायें और साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों का चित्र बनायें. संध्या काल में इन चित्रों की पूजा करें| अहोई पूजा में एक अन्य विधान यह भी है कि चांदी की अहोई बनाई जाती है जिसे स्याहु कहते है| इस स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व भात से की जाती है. पूजा चाहे आप जिस विधि से करें लेकिन दोनों में ही पूजा के लिए एक  कलश में जल भर कर रख लें| पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुने और सुनाएं|

पूजा के पश्चात सासु मां को बयना दे और पैर छूएं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें.| इसके पश्चात व्रत अन्न जल ग्रहण करें|

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त

अष्टमी तिथि प्रारम्भ – 06:55 बजे  ( 31 अक्तूबर 2018)

अष्टमी तिथि समाप्त – 04:59 बजे ( 1 Nov 2018)

पूजा समय – सांय 5:50 से 19:06 तक ( 31 अक्तूब 2018)

तारों के दिखने का समय  6:18 बजे

चंद्रोदय – 11:53

 

Post Author: Seema Gupta