GANESH JI SPECIAL

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ॐ श्री गणेशाय नमः

क्यों की जाती है सबसे पहले गणेश जी की पूजा

हम सभी लोग कोई भी शुभ काम करने से पहले भगवान् श्री गणेश जी की पूजा करते है| पर क्यों ये बात हम सभी में से कुछ ही लोग जानते है |सिर्फ यही नहीं, हिंदी में तो एक मुहावरा भी है: श्री गणेश करना जिसका अर्थ है किसी भी कार्य का शुभारम्भ या किसी भी काम को शुरू करना . तो आइये फिर जानते हैं की क्या कारण है की ब्रह्मा, शिव, विष्णु और अन्य सभी परम पूजनीय कई भगवानों की बजाय सर्वप्रथम पूजा गणपति की ही क्यों होती है |

इस विषय में एक कथा प्रचलित है | जिसके बारे में हम आज अआपको इस एक कथा के बारे में बताएँगे | श्री गणेश के समतुल्य और कोई देवता नहीं हैं. इनकी पूजा किये बिना कोई भी मांगलिक कार्य, अनुष्ठान या महोत्सव की शुरुआत नहीं की जा सकती |

एक बार की बात है समस्त देवताओं में इस बात पर विवाद उत्पन्न हुआ कि धरती पर किस देवता की पूजा समस्त देवगणों से पहले हो. सभी देवता स्वयं को ही सर्वश्रेष्ठ बताने लगे. तब नारद जी ने इस स्थिति को देखते हुए सभी देवताओ को भगवान शिवजी की शरण में जाने व उनसे इस प्रश्न का उत्तर पूछने की सलाह दी |

जब सभी देवता भगवान  शिवजी के पास गये और अपनी परेशानी भगवन शिवजी के समक्ष बताई | तो भगवान शिव ने इसे सुलझाने की एक योजना सोची, उन्होंने एक प्रतियोगिता आयोजित की. सभी देवताओ को कहा गया कि वे सभी अपने-अपने वाहनों पर बैठकर इस पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर आए| इस प्रतियोगिता में जो भी सर्वप्रथम ब्रह्माण्ड की परिक्रमा कर उनके पास पहुंचेगा, वही सर्वप्रथम पूजनीय माना जाएग |

सभी देवता अपना अपना वाहन लेकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े, क्योकि गणेश जी भी इसी प्रतियोगिता का हिस्सा थे| वे सोचने लगे की मेरा वहां तो बहुत छोटा है तो मै क्या करू कुछ सोचने के बाद गणेश जी बाकी देवताओं की तरह ब्रह्माण्ड के चक्कर लगाने की जगह अपने माता-पिता शिव-पार्वती की सात परिक्रमा पूर्ण कर उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हो गए|

जब समस्त देवता अपनी अपनी परिक्रमा करके लौटे तब भगवान शिव ने श्री गणेश को प्रतियोगिता का विजयी घोषित कर दिया| सभी देवता यह निर्णय सुनकर अचंभित हो गए और शिव भगवान से इसका कारण पूछने लगे|

तो  शिवजी  ने उन्हें बताया कि माता-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड एवं समस्त लोक में सर्वोच्च स्थान दिया गया है| वो देवताओं व समस्त सृष्टि से भी उच्च माने गए हैं.|तब सभी देवता, भगवान शिवजी  के इस निर्णय से सहमत हुए |तभी से गणेश जी को सर्वप्रथम पूज्य माना जाने लगा और उनकी पूजा सभी कार्यो से पूर्व की जाने लगी |यही कारण है कि भगवान गणेश अपने तेज़ बुद्धिबल के प्रयोग के कारण देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाने लगे. तब से आज तक प्रत्येक शुभ कार्य या उत्सव से पूर्व गणेश वन्दन को शुभ माना गया है|

 गणेश जी की पूजा  सभी दुःखों को दूर करने वाला एवं खुशहाली लाने वाली है. अतः सभी भक्तों को पूरी श्रद्धा व आस्था से गणेश जी  का पूजन हर शुभ कार्य से पूर्व करना चाहिए|गणेश जी को मोदक बहुत अधिक पसन्द है | इसलिए इनके प्रसाद में मोदक का भोग एगेट है यदि आप भी मोदक बनाना चाहते है तो हमारे इस link पर cick करे : मोदक

Post Author: Seema Gupta