२०१७ में भगवान् शिव के सबसे प्रिय दिन सोमवार से सुरु हो रहे सावन का विशेष महत्व है, सावन माह में पूजा करते समय ध्यान रहे ये बाते

जय भोले नाथ ! दोस्तों ! सावन का महिना है | ऐसे सुहाने मोसम में हम भोले नाथ जी को केसे भूल सकते है | सभी जानते है की सावन का  महीने भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना गया  है |सावन माह भगवान शिव का सबसे प्रिय माह है |शास्त्रों के अनुसार , सावन माह में प्रत्येक सोमवार को शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी  सुबह उठकर  नहा धोकर भक्ति आराधना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है | माना जाता है की सावन माह में सिर्फ एक लोटा जल चडाने मात्र से शिव जी प्रसन्न हो जाते है और सभी मनोकामना पूरी कर देते है | सावन माह में नियमित शिव मंदिर जाकर या घर पर ही विधि विधान से शिवलिंग पर जल चढाने , बेल पत्र , भांग , धतुरा , दूध या दही आदि से अभिषेक  और रोज पूजा अर्चना करने से पुन्य फल प्राप्त होता है |

दोस्तों ! सावन का महिना  है और  इस बार के सावन का आरम्भ भी शिव जी के सबसे प्रिय दिन सोमवार से हो रहा है | इसलिए सावन में शिव व्रत को विशेष फलदायी माना  गया है | आईये आज हम आपको बतायेंगे की  सावन का  महीने कब से सुरु हो रहा है इसके क्या महत्व है –

आपको सुनकर हैरानी होगी की इस बार का शिव जी का प्रिय सावन माह १० जुलाई यानि की सोमवार से सुरु हो रहा है और 7 अगस्त सोमवार  को ही समाप्त हो रहा है | यह बड़े ख़ुशी की बात है की इस बार के सावन माह में 50 साल बाद ये विशेष संयोग बना है | जो बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है | और सावन माह  के अंतिम दिन सोमवार को ही रक्षाबंधन भी पढ़ रहा है | और संयोग से उसी दिन सावन पूर्णिमा भी है | रक्षाबंधन के दिन भी सबको अपने भाइयों के लिए भी व्रत रखने को मिलेगा | जो की विशेष फलदायी है |

काफी सालों बाद इस माह में पांच सोमवार पड़े है | पुराणों के अनुसार सावन माह में भोले संकर की पूजा , भक्ति , आराधना , अभिषेक , मंत्र उच्चारण का विशेष महत्व है | माना जाता है की सोमवार के दिन शिव जी की आराधना करने से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न हो जाते है | सावन के प्रत्येक सोमवार का अपना एक विशेष महत्व है | सावन माह में प्रत्येक सोमवार को पूजा करने और दिन भर उपवास रखने से व जल चडाने से सभी की सभी मनोकामना पूरी हो जाती है |और सभी कष्टों से मुक्ति , निसंतान को संतान , कुवारी को वर , निर्धन को धन मिल जाता है |

सावन माह में पूजा करते समय ध्यान रहे ये बाते – 

  • हमेशा पूर्व की तरफ मुह करके पूजा करे | पीठ को दक्षिण की तरफ ही रखे  |
  • हमेशा गंगा जल को तांबे के बर्तन में ही रखे | एल्युमीनियम , स्टील आदि ऐसे अपवित्र बर्तन में न रखे |
  • शिव लिंग को दूध , दही , शहद और जल से अभिषेक करे या पंचामृत से अभिषेक करे |
  • शिव लिंग की हमेशा आधी परिक्रमा करे और भूलकर कभी भी पूरी परिक्रमा न करे |
  • शिव , गणेश , और भेरव की मूर्तियों पर  कभी भी तुलसी न चढाये , इससे पूजा का उल्टा प्रभाव होता है |
  • केतकी का पुष्प , हल्दी , नारियल का पानी और कुमकुम आदि  शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए |
  • आंक का पुष्प शिवलिंग पर चढ़ा सकते है | और रुद्राक्ष , भस्म और चन्दन चढ़ाएं |
  • घर में कभी भी दो शिवलिंग स्थापित न करे | साथ में परिवार के सदस्य पार्वती , गणेश , कार्तिकेय , आभूषण एवम नंदी की मुर्तिया जरुर स्थापित करे |
  • शिवलिंग पर बेल पत्र चडाने का विधान है | ध्यान रहे बेल पत्र कटे – फटे या कीड़े के खाए हुए नहीं हो | एक दम सही बेल पत्र ही चढ़ाये |
  • सुबह उठे और स्नान करके पूजा अर्चना करनि चाहिए |
  • शिव जी को गंगाजल  बहुत प्रिय है |
  • पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय जप करना चाहिए |
  • उप्वाश के समय भोजन में फलहारी भोजन करना चाहिए | फलहारी भोजन सिर्फ एक बार ही करे |
  • अगले दिन सुबह स्नान करके शिवजी की पूजा करे और तभी व्रत की समाप्ति होती है |

दोस्तों हमें जरुर बताये की आपको हमारी सावन के सोमवार व्रत के के महत्व बारे में बताई गयी बाते केसी लगी है | यदि हमारे दुवारा बताई गयी बाते आपको वाकई अच्छी लगी है तो कमेंट में जय भोले नाथ / बम बम भोले / जय शिव शंकर जरुर लिखे |

|| जय भोले नाथ ||

 

 

Post Author: Pooja Aggarwal