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महाराणा प्रताप और उनका चहेता घोडा चेतक की कहानी

महाराणा प्रताप का जीवन परिचय – महाराणा प्रताप एक बहुत ही शक्तिशाली शासक थे | इनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ़ में महाराणा  उदयसिंह और माता राणी जीवत कंवर के घर हुआ था | ये उदयपुर , मेवाड़ में शिसोदिया वंश के एक वीर राजा थे | राणाप्रताप का कद साढ़े सात फुट और वजन ११० किलोग्राम था | ये अपनी वीरता के लिए इतिहास में अमर् है | ये एक ऐसे योद्धा थे | जिन्होंने मुगलों को छठी का दूध याद दिला दिया था | इन्होने मुगलों को कई बार युद्ध में हराया | लगातार ३० वर्षो तक प्रयास के बावजूद अकबर राणा प्रताप को नहीं हरा सका और नहीं कभी बंदी बना पाया | इन्होने प्रत्येक परिस्थिति में अपनी आखिरी साँस तक अपनी प्रजा की रक्षा करी |

महराणा प्रताप का चहेता घोडा चेतक – भारतीय इतिहास में जितनी प्रशंशा महाराणा प्रताप की करी जाती है| उतनी ही प्रशंशा उनके सबसे चहेते घोड़े चेतक की भी की जाती है | हल्दीघाटी के युद्ध में उनका प्रिय घोडा चेतक उनका सबसे बड़ा सहयोगी रहा है | लगभग चार साल तक महाराणा प्रताप और चेतक एक साथ रहे और इन्ही चार सालो में उन्होंने अपनी वीरता का इतिहाश रच डाला | चेतक एक नीले रंग का अफगानी घोडा था | जो बहुत ही वीर , साहसी और फुर्तीला था | चेतक तूफान की तरह उड़ता था इसलिए उसका नाम चेतक रख दिया था | चेतक भी राणा प्रताप की तरह बहुत बहादुर था |

चेतक की वीरता का पता इस बात से लगाया जा सकता है जब हल्दीघाटी का युद्ध हुआ तब चेतक ने अकबर के सेनापति मानसिंह के हाथी के सिर की ऊँचाई तक छलांग लगाकर हाथी के सर पर पैर रख दिया और तभी राणा प्रताप ने भाले से मानसिंह पर प्रहार कर डाला | जब मुग़ल सेना राणा प्रताप के पीछे लगी थी | उस समय चेतक ने अपनी जान दाव पर लगाकर २५ फुट गहरे दरिया को लम्बी छलांग लगाकर पार करके महाराणा प्रताप की जान बचाई | इस दरिया को कोई मुग़ल पार नहीं कर पाया |

चेतक की म्रत्यु –  अंत में महाराणा प्रताप की विजय हुयी | लेकिन युद्ध बहुत ही भयंकर होने के कारण वे बुरी तरह घायल हो गये और इस वजह से राणा प्रताप को रण भूमि छोडनी पड़ी और इसी युद्ध स्थल के पास ही चेतक की म्रत्यु हो गयी और वो वीरगति को प्राप्त हुआ |

हल्दीघाटी में आज भी चेतक की समाधी बनी हुयी है | राणा प्रताप और उनके भाई शक्ति सिंह ने स्वयं अपने हाथो से चेतक का दाह संस्कार किया | महाराणा प्रताप और चेतक का बहुत गहरा सम्बन्ध था | चेतक बहुत ही समझदार था | वो अपने मलिक को खुद ही ढून्ढ लेता था |

अकबर महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु था | लेकिन उनकी लडाई कोई व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं थी | यह लडाई उनके मूल्यों और सिद्धांतो की लडाई थी |

महराना प्रताप की म्रत्यु पर दुखी हुए अकबर –  जब महाराणा प्रताप की म्रत्यु हुयी तब अकबर लाहोर में थे | जब ये खबर अकबर को मिली तो वो ये सुनकर अचंभित हो गये | और अकबर को राणा प्रताप की म्रत्यु का बहुत दुःख हुआ क्यूंकि ह्रदय से अकबर महाराणा प्रताप के गुणों का प्रसंसक था | अकबर भी जानता था की प्रताप जेसा वीर दूसरा कोई नही था |

इस तरह चेतक और महाराणा प्रताप की बहादुरी की कहानिया दुनिया भर में इतिहास के पन्नो पर छपी हुयी है | जिन्हें पढ़कर लोग आज भी उनकी तारीफ करते थकते नहीं है |

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Post Author: Pooja Aggarwal