Vrindavan Banke Bihari Krishna Temple

बांके बिहारी जी के अदभुत चमत्कार जिन्हें सुनकर आप भी रंग जायेंगे बांके के रंग में

बोलो श्री बांके बिहारी लाल की – जय !

दोस्तों !आज हम आपको श्री बांके बिहारी जी के अदभुत चमत्कार के बारे में बतायेंगे | जिन्हें सुनकर आप भी हैरान हो जायेंगे और बांके बिहारी जी के भक्त बन जायेंगे | आओ जाने –

एक दिन की बात है | एक गरीब , इमानदार  ब्राह्मण था | जो श्री बांके बिहारी जी का परम भक्त था | उसके एक बहुत ही सुंदर और समझदार बेटी  और पत्नी साथ रहती  थी |उसकी स्थिति बड़ी ख़राब थी | उसके पास कुछ खाने को नहीं था और उसे अपनी बेटी की चिंता लगी रहती थी | वो बहुत गरीब था | वो ब्राह्मण  एक जमीदार के खेतों में रोज काम करता था और उन पैसे से  अपने परिवार को चलाता था | जमीदार बहुत ही इमानदार व्यक्ति था | और उसके दो बेटे और पत्नी थी |

अब ब्राह्मण की  बेटी  बड़ी हो गयी थी |और उसकी पत्नी को उनकी शादी की चिंता लगी रहती थी | पर उनके पास कुछ भी नहीं था जिससे वो अपनी बेटियों की शादी कर सके |गरीबी की वजह से कोई उनकी बेटियों से शादी नहीं करता था | एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने ब्राह्मण से कहा की तुम कुछ पैसे जमीदार से उधार ले लो और बेटी  की शादी किसी अच्छे परिवार में कर दो | ब्राह्मण पैसे उधार लेने को तैयार नहीं हुआ और आये दिन अपने बांके बिहारी जी का नाम जपता और पूजा – पाठ क्या करता | अब उसकी पत्नी रोज – रोज उससे बेटी की शादी की बात को लेकर ब्राह्मण से झगडती रहती थी |

एक दिन वो ब्राह्मण अपनी पत्नी की बात मानकर जमीदार के घर गया और उसने पैसे उधार मांगने चाहे पर वो ब्राह्मण पैसे लेने में संकोच करने लगा और बिना कुछ बोले ही अपने घर लौट आया | अब पत्नी ने ब्राह्मण से पूछा तो उसने पूरी बात बता दी |की वो पैसे नही मांग सका | पत्नी को बहुत गुस्सा भी आया पर वो कर भी क्या सकती थी |

अब अगले दिन जमीदार पुलिस को लेकर ब्राह्मण के घर आया और उसने पुलिस को कहा की ब्राह्मण ने उसके घर से उसकी पत्नी का हार चुराया है | ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने बहुत सफाई दी और काफी समझाया भी और अपने बांके बिहारी की कसंम भी खायी | लेकिन जमीदार ने उनकी एक भी बात नहीं मानी और ब्राह्मण को पुलिस के हवाले कर दिया |

अब क्या था वो ब्राह्मण जेल में अपने प्रभु बांके बिहारी को याद करता और रात दिन श्री बांके बिहारी जी का नाम जपता रहता हूँ  | एक दिन ब्राह्मण अपने मन में बांके बिहारी जी से कह रहा था | हे प्रभु ! मेने ऐसा कोन सा पाप किया है जो आपने मुझे बिना किसी अपराध के सजा दिलाई है | इस जनम में तो मेने कोई पाप भी नहीं किया और दिन रात आपकी सेवा करता और आपका नाम जपता रहता हु | फिर आप मुझे ये किस गलती की सजा दे रहे हो | उसी दिन रात में स्वप्न में आकर बांके बिहारी जी उनसे कहते है की ब्राह्मण तुमने  इस जनम में कोई अपराध नहीं किआ है | तुम तो मेरे परम भक्त है | और मै तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ  | मै तो तुम्हारी परीक्षा ले रहा था | औरतुम उस परीक्षा में उत्तीर्ण हो गये हो | अब मै तुम्हारे सभी दुःख दूर क्र दूंगा |

अगले दिन सुबह का समय था | जमीदार पुलिस थाने आता है और पुलिस वालों से ब्राह्मण को छोड़ने के लिए कहता है और अपनी रिपोर्ट वापस लेता है | पुलिस वाले जमीदार के कहने पर उस ब्राह्मण को छोड़ देते है |  वो जमीदार ब्राह्मण से माफ़ी मांगता है और कहता है की मेरी पत्नी अपना हार कही रख कर भूल गयी थी और अब हार मिल गया है | हमने  सोचा था की हार चोरी हो गया है और उस दिन  तुम ही हमारे घर पर आये थे | हमसे बहुत बड़ी भूल हो गयी हमने तुम्हे गलत समझा | हमे माफ़ कर दो | जमीदार ब्राह्मण को अपने घर ले जाता है और ब्राह्मण का खूब आदर सत्कार करता है और बहुत सारी भेंट भी देता है | जमीदार ब्राह्मण की इमानदारी से बहुत प्रसन्न हो जाता है  | वो अपने बड़े बेटे  का विवाह ब्राह्मण की  बेटी  से करवाने की बात कहता है | ब्राह्मण ये सब सुनकर आश्चर्य में पढ़ जाता है | और जमीदार से कहता है की आप बहुत बड़े है और मै बहुत ही छोटा मामूली सा व्यक्ति हूँ | ये केसे सम्भव हो सकता है | मेरे पास मेरी बेटी के सिवा कुछ नहीं  है | ये सुनकर जमीदार मुस्कुराता है और कहता है की मुझे और कुछ नही बस एक सुंदर सुशील बेटी ही तो चाहिए | अब दोनों की शादी हो जाती है | और ब्राह्मण भी अपनी पत्नी के साथ आराम से जीवन व्यतीत करता है |

 

Post Author: Pooja Aggarwal