निर्जला एकादशी व्रत का महत्व , एक व्रत में ही मिलेगा २३ व्रत का फल , निर्जला एकादशी व्रतकथा

निर्जला एकादशी व्रत करने का महत्व –  हिन्दु धर्म में  बहुत से व्रत होते है | इनमे निर्जला एकादशी व्रत का विशेष महत्व है | आज निर्जला एकादशी व्रत है | वेसे तो साल में २४ एकादशी व्रत होते है | लेकिन अधिकमास और  मलमास में व्रत बढ़ जाते है और २६ व्रत होते है | इस एकमात्र  निर्जला एकादशी व्रत को करने से पुरे साल में होने वाले २३ एकादशी व्रत के फल का पुण्य एक साथ मिल जाता है | इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है |ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है |निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी और पाण्डव एकादशी आदि अनेक नामो से पुकारा जाता है | इस दिन निर्जला एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को सभी पापो से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है |

 

निर्जला एकादशी व्रत करने की विधि – निर्जला एकादशी व्रत करने के लिए सूर्य निकलने से पहले सुबह – सुबह उठकर  स्नान आदि करते है | इस व्रत को करने के लिए जल पीना वर्जित होता है | इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते है | पुरे विधान से पूजा पाठ करके कथा पड़ी जाती है |दिन भर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते रहते है | इस दिन दिन – दुखियों और ब्राह्मणों को सामर्थानुसार दान दक्षिणा देना बहुत शुभ माना जाता  है | अगले दिन सुबह जल और भोजन ग्रहण करते है |

निर्जला एकादशी व्रत की कथा – महाभारत काल में भीमसेन ने व्यास जी से कहा की हे परमपिता परमेश्वर मेरी सहायता करे | भाई युधिस्थिर , माता कुंती ,नकुल , सहदेव , अर्जुन ,द्रोपदी आदि सभी निर्जला एकादशी     का व्रत पुरे  विधि – विधान से करते है | और ये  सभी मुझे भी निर्जला एकादशी का व्रत करने के लिए कह रहे है |लेकिन मै भूख बर्दास्त नहीं कर  सकता हु | बिना खाना खाए एक पल भी नहीं रह सकता हु |मै दान आदि देकर ही वासुदेव को प्रसन्न करना चाहता हूँ |मै एकादशी के दो व्रत नहीं क्र सकता | मुझे कोई ऐसा व्रत बताए  जो की पुरे वर्ष में एक ही  बार व्रत करना हो | और इस व्रत को करने से मेरे समस्त पापो से मुक्ति मिल जाये और मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो |

ये सब सुनकर व्यास जी कहने लगे की हे पुत्र ! हमारे शास्त्रों में दोनों पक्षों के एकादशी व्रत का विशेष महत्त्व है | जो वर्ष में सिर्फ एक बार ही करने मात्र से तुम्हे २३ एकादशी व्रत के बराबर फल प्राप्त होगा |अगर तुम स्वर्ग जाना चाहते हो तो इस  निर्जला एकादशी का व्रत जरुर करो | इस दिन भूखा रहकर व्रत करने से तुम्हे पापो से मुक्ति मिलेगी और स्वर्ग की प्राप्ति होगी | ये व्रत वृषभ  और मिथुन की संक्रांति के बीच ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी में पड़ता है | जिसे निर्जला एकादशी कहते है | इस व्रत में स्नान करने और आचमन करने के सिवा जल वर्जित है | इस व्रत में अन्न नहीं खाते | अन्न खाने से व्रत खंडित हो जाता है |

इस दिन एकादशी के सूर्य उदय से लेकर दुवादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं करना चाहिए |ऐसा करने से उस व्यक्ति को सभी पापो से मुक्ति मिलती है और सभी एकादशी के व्रत का फल प्राप्त होता है | दुवादशी में सुबह सूर्य निकलने से पहले स्नान आदि करके  पूजा – पाठ करते है   | ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देते है | आप चाहे तो आज के दिन गों दान भी कर  सकते है | सबसे पहले गाय को रोटी खिलाते है फिर भूखे मनुष्य और ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्चात स्वयं भोजन करते है |

व्यास जी की ये बाते सुनकर भीमसेन डर गया और निर्जला एकादशी का व्रत रखने के लिए तैयार हो गया | और भीमसेन ने इस व्रत को करा और  अपने सभी पापों से मुक्ति पा ली |

आप सब भी निर्जला एकादशी का व्रत करे और अपने समस्त दुखो से छुटकारा पाए और मोक्ष की प्रप्ति कर सकते है |

 

 

Post Author: Pooja Aggarwal