धृतराष्ट्र का लालच

धृतराष्ट्र का लालच

 

धृतराष्ट्र का लालच

नमस्कार दोस्तों आज मे bookbaak.com पर एक कहानी लिख रही हु जो बहुत ही  प्रेरणाप्रद है | इसे आप सभी पड़े और बच्चो को भी पढाए या सुनाये |

हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र जन्म से ही अंधे थे। यही कारण था की वे ज्येष्ठ पुत्र होते हुए भी राजा बनने की काबिलियत उनमे नहीं थी। परंतु उनके छोटे भाई राजा पांडु एक गंभीर बीमारी के कारण वन चले गए थे| इसलिए धृतराष्ट्र को पांडु का प्रतिनिधि राजा बनाया गया था।

एक बार रजा बनाने के बाद धृतराष्ट्र चाहते थे की उनके बाद हस्तिनापुर का राजा उनके पुत्र दुर्योधन को बनाया जाए | इसी कारण उन्होने न्याय और अन्याय मेंपर विचार करना छोड़ दिया, और अपने पुत्र को रजा बनाने की कोशिश में लग गए |इसी कारण वे हर जगह अन्याय करने लगे |

दुर्योधन भी अपने भाई पांडवों से नफ़रत करता था इसीलिए उसने भीम को ज़हर देकर नदी में डुबोना चाहा एवं लाक्षाग्रह में आग लगा कर पांडु पुत्रों और कुंती को ज़िंदा जला देने का प्रयास भी किया | और तो और  द्रौपदी चीर हरण, चोपड़ में भी    कपट से पांडवों को वनवास भेज दिया और ना जाने ऐसे कई षड्यंत्र उसने पांडवों के खिलाफ किये |

अंत में जब धर्म युध हुआ। तो उस महायुद्ध में लालची धृतराष्ट्र के 100 पुत्रो की  मृत्यु हो गयी । और अपने लालच के कारण उसने अपना पूरा वंश समाप्त कर दिया | और अंत में शर्मिंदगी और हार के कारण धृतराष्ट्र अपनी पत्नी के साथ  चले जाते हैं।

Post Author: Seema Gupta