करवाचौथ व्रत कथा इन हिंदी

करवाचौथ व्रत कथा इन हिंदी

हिन्दुओ के बहुत सारे त्योहार और व्रत है | लेकिन करवाचौथ का व्रत हिन्दू महिलाओ का सबसे महत्वपूर्ण व्रत है | जिसे ये पूरी श्रदा से करते है | करवाचौथ का व्रत महिलाये अपने पति की लम्बी आयु के लिए रखती है | वेसे तो करवाचौथ की अनेक कथा है लेकिन सबका अर्थ एक ही निकलता है | इस बार करवाचौथ का व्रत 27 अक्टूबर 2018  है |करवा चौथ शुभ महूरत में कैसे करे यह भी आप (करवा चौथ शुभ महूरत) इस पर क्लिक करके पढ़ सकते है |

करवाचौथ व्रत कथा –

ये व्रत केवल सुहागिन स्त्रियाँ ही रख सकती है | करवाचौथ व्रत में कथा सुनने और कहने का प्रचलन प्राचीनकाल से चला आ रहा है | व्रत रखने पर कथा सुनने का बहुत महत्व है | सुहागिन स्त्रियाँ व्रत के दोरान शाम को एक जगह इकट्ठा होकर करवाचौथ व्रत कथा सुनती है | आओ जाने करवाचौथ व्रत कथा –

बहुत समय पहले की बात है | एक सहूकार था उसके सात बेटे और एक लौती बेटी थी | जिसका नाम था करवा |

करवा सात भाइयो की एक लौटी बहिन थी | सभी भाई करवा को बहुत प्यार करते थे और उसका बहुत ख्याल रखते थे | एक दिन आया और करवा बड़ी हुयी |

साहूकार ने उसका विवाह एक अच्छे परिवार में कर दिया | एक बार करवा अपने मायके आयी हुयी थी |

कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को साहूकार के घर की महिलाओ ने करवाचौथ का व्रत रखा | तब बहिन करवा ने भी करवा चौथ का व्रत रखा | जब रात्रि के समय साहूकार के बेटे भोजन करने बैठे तो उन्होंने बहिन से भी भोजन करने के लिए कहा | तब बहिन ने कहा की भैय्या मेरा व्रत है | मै चाँद को अर्ध्य देकर ही भोजन ग्रहण करूंगी | भाइयों से बहिन का भूख से मुरझाया चेहरा देखा नहीं गया | तब छोटा भाई एक पेड़ पर चढ़ा और उसने एक चलनी में रखकर दिया जला दिया | दूर से देखने पर ऐसा लग रहा था जेसे चाँद निकल आया हो | फिर दुसरे भाई से बहिन को बताने के लिए कहा की चाँद निकल आया है | तुम उसे अर्ध्य देकर भोजन क्र सकती हो | बहन ने भाभियों से भी कहा की चाँद निकल गया है | तब भाभी ने करवा से कहा की अभी चाँद नही निकला है | तुम्हारे भाई ने दिया जलाकर तुम्हे चाँद दिखाया है | लेकिन करवा को अपने भाइयों पर विश्वास हो गया और भाइयों के कहने पर बहिन ख़ुशी से फुला नही समाती और सीढियों से चढ़कर चाँद को देखती है फिर अर्ध्य देकर खाना खाने लगती है |

अब करवा पहला निवाला मुह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है | फिर दूसरा निवाला मुह में डालती है तो बाल आ जाता है | जब करवा जेसे ही तीसरा निवाला मुह में डालने लगती है वेसे ही उसके ससुराल से खबर आई की उसके पति की तबियत बहुत ख़राब है | ये सुनकर करवा बहुत विचलित हो उठी ||

उसकी भाभी ने उसे बताया की उसने व्रत विधिपूर्वक नहीं किया | इसलिए भगवान् गणेश उससे रुष्ट हो गये और उन्होंने उसके साथ ऐसा किया है |

जब करवा अपने ससुराल जाने लगी और उसने बक्से से अपने कपड़े निकाले तो तीनो बार सफ़ेद रंग के कपडे ही हाथ में आये | अब जल्दी में वह वही कपडे पहनकर ही ससुराल जाने लगी | फिर उसकी मा ने उसे एक सोने का सिक्का उसके पल्लू से बांध दिया और कहा की रास्ते में जो भी मिले उनके पैर छूती जाना | और जो भी तुम्हे सुहागिन होने का आशीर्वाद दे | सिर्फ उसी को ये सिक्का देना और अपने पल्लू में गाँठ बांध लेना |

जब करवा चलने लगी तो रास्ते में उसे किसी ने भी सुहागिन होने का आशीर्वाद नहीं दिया | सिर्फ यही कहा की – भगवान् लम्बी आयु दे , सुख समृधि दे , दुःख दूर हो , भाइयों का सुख देखने वाली हो | जब वह अपने ससुराल पहुंची तो उसने देखा दरवाजे पर उसकी सास खड़ी थी और उसकी राह देख रही थी | जब करवा ने अपने सास के पैर छुए तो सास ने आशीर्वाद देते हुए कहा की सदा सुहागिन रहो , भगवान् सात पुत्र दे , दूधो  नहाओ पूतो फलो और मेरे बेटे को सुख देने वाली हो | ये सुनकर करवा खुश हो गयी और उसने तुरंत सोने का सिक्का पल्लू से निकाला और अपनी सास को दे दिया | और घर के अंदर चली गयी | जब वह घर के अंदर पहुंची तो उसने देखा की सामने उसका पति का मृत शरीर पढ़ा था | मृत पति को देखकर करवा बहुत जोर – जोर से रोई और पछताने लगी | करवा चौथ व्रत के दोरान हुयी भूल के लिए अपने आप को दोषी ठहराने लगी | भूख प्यास सब भुलाने के बाद वह अपने पति की सेवा में लग जाती है |

वो अपने पति का अंतिम संस्कार किसी को भी नहीं करने देती | और 1 साल तक वह अपने पति के शव के पास बैठी रही | उसके शव के पास उगने वाली सुईनुमा घास को एकत्र करती रहती |

अब फिर से 1 साल बाद करवाचौथ का व्रत आता है | उसकी सभी भाभिया करवा चौथ का व्रत रखती है | जब भाभिया उससे आशीर्वाद लेने आती है | तब करवा प्रत्येक भाभी से कहती है की – यम सुई ले लो , पिय सुई दे दो , मुझे भी अपनी जेसी सुहागिन बना देने का आग्रह करती है | लेकिन प्रत्येक भाभी उससे अगली भाभी से आग्रह करने के लिए कहकर चली जाती है | अब छठे नंबर की भाभी आई और करवा उससे भी आग्रह करती लेकिन वह करवा से कहती की सबसे छोटे भाई की गलतियों की वजह से ही तुम्हारा सुहाग उजड़ा है इसके लिए तुम्हे सबसे छोटी भाभी से ही अपने सुहाग को जीवित करने के लिए कहना चाहिए | जब छोटी भाभी आशीर्वाद लेने आती तो करवा उनसे भी कहती है की यम सुई ले लो , पिय सुई दे दो , मुझे भी अपने जेसी सुहागिन बना दो | लेकिन वो भाभी भी टाल मटोल करके जाने लगती है तभी करवा उनको अपने हाथो से जकड लेती है और भाभी से अपने सुहाग को जीवित करने का आग्रह करती है |भाभी उससे अपने आप को छुडवाने का बहुत प्रयास करती है लेकिन छुड़ा नहीं पाती |

अंत; भाभी को उस पर दया आ जाती है और उसकी भाभी उसे अपने हाथो से मेहँदी , बिंदी , काजल , सिन्दूर और करवा देती है | तभी भाभी की वजह से और गणेश जी और करवा माता की कृपा से उसका पति तुरंत जीवित हो उठता है और गणेश की जय कहता है | तभी से ये करवा चौथ का व्रत चला आ रहा है |

” हे गणेश भगवान जेसे आपने करवा को आपसे चिर सुहागिन का आशीर्वाद मिला है , वेसे ही सब सुहागिनों का सुहाग बना रहे | “

दोस्तों  आपको ये करवा चौथ की कथा केसी लगी है | अगर आपको ये करवा चौथ व्रत कथा पसंद आई हो तो आप ऐसी हो और भी कथा पढने के लिए WWW.BOOKBAAK.COM पर क्लिक करे |

Post Author: Pooja Aggarwal